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Tuesday, 9 October 2012

A Thyroid Poem


A Thyroid Poem
Butterfly
Shaped like a butterfly she sits within the neck
Wanting only to share her beauty throughout the body and awakening all cells
Yet faithful to her messenger she will evolve with the information sent
She can race forth spinning your entire being into a frenzy
Awakening you in the midst of the night saturated with sweat and palpitating heart
Or she can lull you to sleep and make you feel so melancholy or down right
Depressed and angry for no particular reason
Whatever the affects her presence will be felt by every part of your being
When feeling fine and neither up nor down do not think that she has forgotten you
For at this time she simply sits on her throne, her wings spread wide,
as she escorts You through your journey
There have been cells that have turned against her, most of them without the strength
To fully conquer her fortress
Other have penetrated her and have caused her great harm
But she continues to evolve with the force of such intrusions while desperately
Attempting to maintain her exalted position
She will fight to save her fortress and keep her chamber safe, but eventually she
Will give in to the information she receives and must subjugate her will to the will Of the informer
Although her wings may be clipped, she is still a beautiful butterfly, she remains
Exalted, meaning only well for the body she inhabits and loyal to her messenger

ऑस्‍कर वाइल्‍ड की क्लासिक कहानी - बुलबुल और गुलाब

ऑस्‍कर वाइल्‍ड की क्लासिक कहानी - बुलबुल और गुलाब

यह कहानी मेरी प्रिय प्रेम कहानियों में से एक है। पिछले दिनों प्रेम दिवस के पूर्व रविवार 13 फरवरी, 2011 को यह राजस्‍थान पत्रिका के रविवारीय संस्‍करण में प्रकाशित हुई। इस लंबी कहानी को अखबार के लिए कुछ संक्षिप्‍त किया गया है।

"उसने कहा है कि अगर मैं उसके लिए एक लाल गुलाब ले आऊँ तो वह मेरे साथ नृत्य करेगी! लेकिन मेरे बगीचे में तो एक भी लाल गुलाब नहीं है" अपने आप से बात करते हुए वह नौजवान रोने लगा।

बगल के दरख़्त पर घौसले में बैठी बुलबुल ने उसे रोते सुना और पत्तियों की तरफ देख वह आश्चर्यचकित हो उठी । वह रो रहा था और उसकी खूबसूरत आँखों के प्याले आँसुओं के मोतियों से भर गए! "ओह, जिंदगी में कभी-कभी खुशियाँ कितनी छोटी-छोटी चीजों पर टिकी होती हैं ! मेरा सारा ज्ञान और दर्शनशास्त्र का अध्ययन बेकार है। एक अदने से लाल गुलाब की चाहत ने मेरी जिंदगी नरक बना दी है।"

"कम से कम इस दुनिया में एक सच्चा प्रेमी तो है।" बुलबुल चहक उठी, "मैं रातों में जिस अनजान प्रेमी के लिए गाती थी, चांद-तारों को जिसकी कहानी सुनाती थी, वो आज मुझे मिल ही गया। इसके बाल लाल गुलाबी पारदर्शी फूल जैसे हैं, और होंठ जैसे सुर्ख गुलाब, ठीक वैसे ही जैसी उसकी चाहत है। लेकिन चेहरा कुम्हलाया हुआ, कांतिहीन, हाथी दांत जैसा पीला। दुःख और संताप की स्पष्ट छाप इसके माथे पर छपी है।"

नौजवान बुदबुदाया, ‘कल राजकुंवर ने नृत्य की शाम सजाई है। वो भी वहां होगी। काश अगर मैं उसे सुर्ख गुलाब ला दूं तो उसे अपनी बाँहों में भर सकूंगा , और वह मेरे काँधों पर अपना सर टिकाए रात भर मेरे साथ नाचेगी। लेकिन मेरे बगीचे में कोई सुर्ख गुलाब नहीं है, इसलिए मुझे अकेले ही बैठना होगा, और वह बाय कहती हुई मेरे करीब से गुज़र जायेगी।"

"यकीनन यह सच्चा प्रेमी है" , बुलबुल ने कहा। "इसके कष्ट पर मैं क्या गाऊँ ? क्या इसके दर्द में मेरा गाना वाजिब होगा? सच में प्रेम है ही ऐसी निराली चीज! यह मोती-माणिक से भी बड़ा है, ना तो इसे खरीद सकते और ना ही यह हाट-बाज़ारों में मिल सकता है।"

"साजिंदे गलियारे में अपनी जगहें लेते चले जायेंगे", नौजवान ने खुद से कहा, "वे अपने वाद्ययंत्रों के तंतुओं को छेड़ना शुरू करेंगे, और मेरी महबूबा उनकी धुनों पर तल्लीन होकर नाचने लगेगी। वह इस कदर नाचेगी कि उसके पांव जमीन को छुएंगे तक नहीं, और दरबार में मौजूद तमाम लोग अपनी चटकीली वेशभूषाओं में उसके चारों ओर मंडरा रहे होंगे। लेकिन वह मेरे साथ नहीं नाचेगी क्योंकि उसे देने के लिए लाल गुलाब जो नहीं है मेरे पास।" इतना कह कर वह निढाल हो घास पर गिर गया और अपना मायूस चेहरा हाथों में लेकर जार-जार रोने लगा।

हरे गिरगिट, सूर्य किरण के गिर्द मंडराती एक तितली और गुलबहार के फूल तक ने उस नौजवान से पूछा, ‘तुम क्यों रो रहे हो?’
"वह एक लाल गुलाब के लिए रो रहा है।" बुलबुल ने कहा।
"सिर्फ एक लाल गुलाब के लिए !!" सब चिल्लाये ! "कितना बेहूदा है यह रोना।" और नन्हा गिरगिट ठठा कर हँस पड़ा।

लेकिन बुलबुल उसके संताप का रहस्य जान चुकी थी। उसने अपना गीत बंद कर दिया और उस गूढ़ प्रेम के विषय में सोचने लगी। अचानक वह अपने साँवले बादामी परों को फैला कर आसमान में बहुत ऊँचे उड़ चली।

दरख्‍तों के पार एक घास के मैदान के बीचो-बीच एक खूबसूरत गुलाब का पौधा था। बुलबुल ने देखा और उसकी ओर उड़ गयी।

"मुझे एक लाल गुलाब दो" वह गिडगिडायी , "बदले में तुम्हारे लिए मैं अपना सबसे मीठा गीत दूंगी!"

लेकिन पौधे ने अपना सिर हिला दिया ! "मेरा गुलाब तो सफ़ेद हैं" उसने जवाब में कहा; "उतना ही सफ़ेद जितना समंदर का झाग होता है , और यह तो पहाड की चोटियों पर पड़ी बर्फ से भी ज्यादा सफ़ेद है ! लेकिन तुम धूपघड़ी के पास मेरे भाई के यहां जाओ, शायद वहां तुम्हारी चाहत पूरी हो जाए।"

जल्दी से उड़ती हुई बुलबुल उस गुलाब के पास गई और अपनी प्रार्थना दोहराई। गुलाब के इस पौधे ने कहा, ‘मेरे पास तो जलपरियों के बालों जैसे पीले फूल होते हैं। तुम्हें छात्रों की खिड़की के पास वाले मेरे भाई के यहां जाना होगा, शायद वह तुम्हारी मदद करे।’

बुलबुल ने उड़ान भरी और खिड़की के नीचे वाले गुलाब के पौधे के पास जाकर अपनी चाहत बताने लगी। पौधा बोला, ‘मेरे पास मूंगे से भी कई गुना लाल सुर्ख गुलाब हैं, लेकिन ठण्‍ड के मारे मेरी नसें जम गई हैं और पाले ने तो सर्दियों की शुरुआत में ही मेरी सारी कलियां नष्ट कर दी थीं। तूफान से मेरी सारी टहनियां टूट गई हैं। अब पूरे साल मुझ पर कोई फूल नहीं खिलेगा।’

दुखी बुलबुल दर्द से कराहती हुई चीखी, ‘मुझे सिर्फ एक लाल गुलाब चाहिए। क्यां किसी भी तरह से एक लाल गुलाब मिल सकता है?’ पौधे ने जवाब में कहा, ‘एक रास्ता है, लेकिन बहुत खतरनाक है। वो मैं तुम्हें नहीं बता सकता।’ बुलबुल बोली, ‘बताओ, मैं नहीं डरूंगी।’ गुलाब के पौधे ने कहा, ‘सुनो अगर तुम्हें लाल गुलाब चाहिए तो चांदनी रात में तुम्हें अपने संगीत और दिल के खून से मुझे सींचना होगा। रात भर तुम मेरे लिए गाओगी और तुम्हारे कलेजे में मेरा कांटा चुभा रहेगा। तुम्हारा लहू मेरी नसों में बहेगा और मेरा हो जाएगा।’ बुलबुल ने कहा, ‘एक लाल गुलाब के लिए जिंदगी का दांव बहुत बड़ा है।’... दुनिया की तमाम खूबसूरत चीजों की तरह जिंदगी सभी को प्यारी होती है, बावजूद इसके प्यार जिंदगी से बेहतर है, बड़ा है। बुलबुल उड़कर वापस अपने शाहबलूत के दरख्त वाले घोंसले के लिए उड़ चली।

वो नौजवान अभी भी घास पर लेटा हुआ था। बुलबुल बोली, ‘अब खुश हो जाओ, तुम्हें तुम्हांरा लाल गुलाब मिल जाएगा। मैं चांदनी रात में अपने गीत से उसे पैदा करूंगी और अपने कलेजे के लहू से उसे सींचूंगी। मैं यही कहने आई हूं कि तुम्ही सच्चे प्रेमी हो। प्रेम ही ईश्वर है।’

युवक ने देखा और सुना, लेकिन वह कुछ भी नहीं समझ सका। वह तो सिर्फ किताबों में पढ़ी बातें ही जानता था, बुलबुल की बात वह कैसे समझता। लेकिन शाहबलूत का वह बूढ़ा दरख्त़ समझ गया था, जिस पर बुलबुल का आशियाना था। उसने बुलबुल से कहा, ‘मेरी खातिर आखिरी बार गाओ मेरी प्यारी बुलबुल... तुम्हारे जाने के बाद मुझे बहुत अकेलापन महसूस होगा।’ और बूढ़े दरख्त की बातें सुन कर बुलबुल उसके लिए गाने लगी। जैसे ही उसने गाना बंद किया, वो नौजवान उठा और चल दिया। रास्ते में चलते हुए भी वह अपनी महबूबा के बारे में सोचता रहा। इसी सोच में वह अपने कमरे में गया और बिस्त‍र पर लेट गया। सोचते सोचते वह सपनों की मीठी नींद में चला गया।

आकाश में चांद दिखते ही बुलबुल उड़कर गुलाब के पौधे के पास पहुंच गई। बिना वक्त गंवाए उसने गुलाब की टहनी का लंबा सा कांटा अपने सीने में पैबस्त कर लिया और गाने लगी। सबसे पहले उसने युवा प्रेमियों के दिलों में पनपने वाले प्रेम का गीत गाया। पौधे के माथे पर एक खूबसूरत गुलाब खिल उठा। बुलबुल जैसे-जैसे गाती रही, गुलाब की पंखुडि़यां खुलती चली गईं। अभी गुलाब के फूल का रंग कोहरे की मानिंद था, रंगहीन सफेद सरीखा। उधर पौधा बुलबुल से बार-बार कह रहा था, ‘प्यारी बुलबुल, कांटे को अपने दिल में कस कर दबाओ, कहीं ऐसा ना हो कि फूल पूरा होने से पहले ही दिन निकल आए।’ बुलबुल ने पूरी ताकत से कांटे को कस लिया और गाना तेज कर दिया। अब वह दो आत्माओं में पनपने वाले अमर प्रेम के गीत गा रही थी।

फूल पर अब गुलाबी रंग छाने लगा था। हालांकि उसका अंदरूनी हिस्सा अभी भी सफेद ही था। अब तो सिर्फ बुलबुल के दिल का लहू ही उसे सुर्ख रंग दे सकता था। इसलिए पौधे ने फिर बुलबुल से जोर लगाने के लिए कहा। बुलबुल ने अपना पूरा दम लगा दिया और आखिरकार कांटा उसके दिल तक पहुंच गया। बुलबुल को भयानक दर्द हुआ और वह दर्द के मारे जोरों से गाने लगी। अब वह उस प्रेम के गीत गा रही थी जो मृत्यु पर जाकर खत्म होता है। बुलबुल की कोशिशें रंग लाईं और आखिरकार गुलाब पूरी तरह पूरब के आसमान जैसा सुर्ख लाल हो गया। बुलबुल की आवाज धीमी पड़ती जा रही थी। उसके पंख तेजी से फड़फड़ा रहे थे-आंखें बंद होती जा रही थीं। बुलबुल ने अब आखिरी तान छेड़ी। इसे सुनकर चांद बादलों में छिपना भूलकर एक जगह स्थिर हो गया। लाल गुलाब इसे सुनकर खुशी के मारे कांप उठा। उसने अपनी तमाम पंखुडियां खोल दीं। पूरे इलाके में एक चीख गूंज गई, जिसे सुनकर सपने देखते गडरिए जाग उठे।

पौधा मारे खुशी के चिल्लाया, ‘देखो, गुलाब पूरा हो गया, देखो।’ बुलबुल कुछ नहीं बोली। कांटा उसके कलेजे में गहरे धंसा हुआ था और वह घास पर मौत की गहरी नींद सो रही थी।

दोपहर में नौजवान ने खिड़की खोल कर देखा तो वह लगभग चीख ही पड़ा, ‘यह रहा मेरा लाल गुलाब, किस्मत का शानदार करिश्मा। मैंने जिंदगी में आज तक ऐसा खूबसूरत लाल गुलाब नहीं देखा।’ उसने झुक कर फूल तोड़ लिया।

हाथ में गुलाब लिए वह माशूका के घर की तरफ दौड़ चला। वहां दरवाजे पर बैठी महबूबा धागे की रील लपेट रही थी। वह चिल्लाया, ‘तुमने कहा था, अगर मैं लाल गुलाब ले आउं तो तुम मेरे साथ नाचोगी। यह दुनिया का सबसे खूबसूरत लाल गुलाब है। आज की रात तुम इसे छाती से लगाओगी। हमारे नाच के वक्ता गुलाब का यह फूल तुम्हें अहसास कराएगा कि मैं तुमसे कितना प्रेम करता हूं।’

लेकिन लड़की ने चंचला स्त्री की तरह मुंह बनाते हुए कहा, ‘हुंह.. मुझे लगता है यह मेरे कपड़ों के रंग से मेल नहीं खाता। यूं भी बड़े सरदार के भतीजे ने मेरे लिए असली माणिक और मोतियों के गहने भेजे हैं। और सब जानते हैं कि गहने और माणिक-मोती फूलों से ज्यादा कीमती होते हैं।’

नौजवान क्रोध में चीखा, ‘तुम बेवफा हो।’ कह कर उसने गुलाब का वह फूल गली में फेंक दिया, जहां वह एक नाली में जाकर गिरा। एक घोड़ागाड़ी आई और फूल को कुचलते हुए निकल गई।

लड़की ने कहा, ‘बेवफा?... हुंह... वैसे भी तुम हो क्या? एक स्टूडेंट ही ना? मैं क्यों वफा करूं? तुम्हारे जूतों में तो सरदार के भतीजे की तरह चांदी के बक्कल भी नहीं होंगे।’ कहकर वह उठी और घर के भीतर चली गई।

नौजवान अपने कमरे में लौटते हुए बुदबुदाया, ‘यह इश्क भी क्यां वाहियात चीज है? तर्कशास्त्र के मुकाबले में तो यह आधी भी उपयोगी चीज नहीं है, क्यों कि इससे कुछ भी सिद्ध नहीं किया जा सकता। जो चीजें नहीं होने वाली, उन्हीं को तो बताता है यह और क्या? इश्क हमें इस यकीन के लिए मजबूर करता है कि यह सच नहीं है, अवास्तविक है, अव्यावहारिक है और मेरी उम्र में तो व्यावहारिकता ही सब कुछ है। अब मैं वापस दर्शनशास्त्र की तरफ लौटूंगा और तत्व मीमांसा पढूंगा।

वह कमरे पर लौटा और धूल से अटी हुई एक पुस्तक उठाई और पढ़ने लग गया।






ऑस्कर वाइल्ड की कहानी - स्वार्थी राक्षस

ऑस्कर वाइल्ड की कहानी - स्वार्थी राक्षस

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अनुवाद - नन्दलाल जैन
स्वार्थी राक्षस
प्रत्येक दिन दोपहर को जब लड़के स्कूल से पढ़कर लौटते थे तो वे राक्षस के बगीचे में खेलने के लिए जाया करते थे।
 यह बगीचा बड़ा और सुन्दर था जिसमें मुलायम हरे घास की मखमल बिछी हुई थी। इधर उधर घास पर सुन्दर पुष्प
आसपास के सितारों की तरह जड़े हुए थे। बगीचे से बाहर मौलश्री के वृक्ष थे जिसमें बसन्त ऋतु में गुलाबी और मोती
 के समान श्वेत मृदुल कलिकायें प्रस्फुटित होती थीं। शरद ऋतु में जिन वृक्षों में बढ़िया फल लगते थे, चिड़ियाँ इन
 वृक्षों पर बैठती थीं और मधुर राग में गाया करती थीं। बच्चे उन्हें सुनने के लिए अपना खेल स्थगित कर दिया करते ये।
 “हम यहाँ कितने सुखी हैं ? वे एक दूसरे से कहा करते। एक दिन राक्षस वापस आया। वह अपने एक मित्र को देखने
गया था और सात साल उसके यहाँ रहा था। जब सात साल व्यतीत हो चुके और जब राक्षस वह सब कह चुका जो उसे
 अपने मित्र से कहना था ( क्योंकि उसका वार्तालाप सीमित था ) तब उसने अपने दुर्ग को वापिस जाने की सोची। जब
 वह वापिस आया तो उसने छोटे छोटे बालकों को अपने बगीचे में खेलते पाया।
“तुम वहाँ क्या कर रहे हो,” राक्षस ने बड़ी ही रूखी आवाज में कहा और जिसे सुनकर सब लड़के भाग गए।
मेरा बग़ीचा, मेरा बगीचा है। यह कोई बतलाने की बात नहीं है और मैं इसमें अपने के अलावा किसी दूसरे को नहीं खेलने
दूंगा। राक्षस ने कहा। इसके बाद उसने बगीचे के चारों तरफ एक ऊँची दीवाल खड़ी की और एक नोटिस बोर्ड लगा दिया
जिसमें लिखा था “आम रास्ता नहीं और जो इस आज्ञा को नहीं
मानेगा और प्रवेश करेगा वह जुर्म का भागी होगा। वह सचमुच में बडा स्वार्थी राक्षस था। बेचारे बच्चों को खेलने के लिए
 अन्य कोई स्थान नहीं था। उन्होंने सड़क पर खेलने की चेष्टा की लेकिन सड़क धूल से भरी हुई धी और जिस पर पत्थर
 भी पड़े हुए थे। इस कारण बच्चे उसे पसन्द नहीं करते थे। वे बगीचे की ऊँची दीवाल के चारों तरफ चक्कर लगाते थे
 और भीतर के सुन्दर बगीचे की चर्चा किया करते थे। स्कूल से लौटते वक्त वे एक दूसरे से कहा करते “हम बगीचे में
 कितने खुश रहते थे”
तब बसन्त ऋतु आई और सब कहीं छोटी छोटी कलिकाएं और नन्हीं नन्हीं चिड़ियाँ देखने लगीं। केवल स्वार्थी राक्षस
के बगीचे में अब भी शीत ऋतु थी। चिड़ियों ने बगीचे में गीत नहीं गाए क्योंकि वहां कोई बच्चे खेलने नहीं आते थे और
वृक्षों में भी नई कोंपलें नहीं फूटी थीं। एक दिन घास में से एक सुन्दर फूल उगा लेकिन जब उसने राक्षस के बगीचे की
वह सूचना देखी तो उसे बच्चों पर इतना दुख हुआ कि वह फिर से जमीन पर गिर कर मुरझा गया। इस सूचना से जिन
 लोगों को प्रसन्नता हुई वे थे बर्फ और कोहरा। उन्होंने कहा – “बसन्त ऋतु इस बगीचे को अपना वरदान देना भूल गई
 है, इसलिए हम लोग साल भर यहीं रहेंगे।”
तत्पश्चात् बर्फ ने सारी घास को अपने सफेद लबादे से ढंक दिया और कोहरे ने सभी पेड़ों पर सफेदी पोत दी। तब उन्होंने
 उत्तरी हवा को बुलाया और वह आ गई। यह हवा दिन-रात बगीचे में बडे जोर और आवाज के साथ बहा करती और
इसने मकानों की चिमनी को गिरा दिया और कहा, “यह तो बहुत अच्छी जगह है और हमें यहाँ ओलों को बुलाना चाहिए।
“ कुछ समय बाद ओले भी आए और वे राक्षस के महल की छत पर प्रतिदिन तीन धण्टे तक तब तक बरसते रहे जब तक
 कि उसकी लगभग सभी चीजें नहीं टूट गईं। तत्र वह बगीचे में चारो ओर खूब तेजी से दौड़-धूप कर नाचता रहा।
“मुझे यह समझ में नहीं आता कि मेरे बाग में बसन्त का उदय क्यो नहीं हो रहा है। खिड़की पर बैठ कर बरफ के समान
सफेद दिखते हुए बगीचे की ओर निहारते हुए राक्षस ने कहा, “मैं आशा करता हूँ कि कुछ दिन में ऋतु परिवर्तन अवश्य
 होगा।“ लेकिन बगीचे में न तो बसन्त ऋतु ही आई और न ग्रीष्म ऋतु ही आई। शरद ऋतु ने सभी बगीचों में सुनहले
 फल कूल दिए परन्तु राक्षस के बगीचे के लिए अब भी कुछ न मिल सका। शरद ने कहा “यह राक्षस बहुत स्वार्थो है।
 इसलिए इस बगीचे में सदा ही शिशिर का राज्य रहा और बर्फ कोहरा ओले और उत्तरी हवायें यहाँ अपनी क्रीडायें करती
 रहीं।
एक दिन सुबह जब राक्षस अपने बिस्तर पर लेटा हुआ जाग रहा था तो उसने एक मोहक गीत सुना। इसकी ध्वनि इतनी
 मधुर थी कि उसने सोचा कि शायद राजा के गायक गण इस मार्ग से जा रहे हैं। सचमुच ही उसकी खिड़की के बाहर एक
 कोयल गाना गा रही थी लेकिन उसने यह गाना इतने अधिक दिनों बाद सुना था कि आज उसे यह पक्षी गायन संसार
 का सबसे सुन्दर संगीत प्रतीत हुआ। इस संगीत के बाद ही ओलों ने उसके सिर पर बरसना बन्द कर दिया और उत्तरी
 हवा ने भी अपना गर्जन बन्द कर दिया। इके बदले उसके खिड़की के खुले अंगों में से एक से सुन्दर महक आने लगी।
 तब उसने कहा “ मैं सोचता हूँ कि आखिर बसन्त आ ही गई”
यह कह कर वह बिस्तर से उछल पड़ा और चारों तरफ देखने लगा। पर उसने क्या देखा? उसने एक बहुत ही
आश्चर्यजनक दृश्य देखा। उसके दुर्ग की चाहर दीवारी में एक छोटा सा छेद था जिसमें से कुछ लड़के रेंग रेंग कर दुर्ग में
 घुस आए ये और वहाँ के बगीचे में लगे वृक्षों की डालियों पर बैठे हुए थे। वह जितने पेड़ देख सकता था उसने देखे और
 प्रत्येक पर एक न एक बालक बैठा पाया। बहुत दिनों के बाद बच्चो को अपने ऊपर बैठा हुआ देख पेड इतने प्रसन्न हुए
कि उनमें फूल उग आए। बच्चों के सिरों पर पत्तों से भरी शाखाएं लहराने लगी। पक्षीगण भी अब इधर उधर घूम रहे थे
और प्रसन्नता से अपनी कूकें मार रहे थे। और हरी घास में से फूल भी धीरे धीरे हँसते हुए से उदित हो रहे थे। यह बहुत
ही सुन्दर दृश्य था। इसके साथ ही बगीचे के एक कोने में अब भी शिशिर थी। यह कोना दुर्ग में बने हुए महल के सबसे
अधिक दूर पर था। यहाँ एक छोटा लड़का खड़ा हुआ था। इतना छोटा था कि वह पेड़ों की डालियों तक नहीं पहुंच सकता
था। और वह अपनी इस असफलता से झुंझला कर इधरउधर घूमता हुआ रो रहा था। बेचारे वृक्ष पर भी काफी कोहरा और
 बर्फ ढंका हुआ था। उत्तरी हवा भी इसके ऊपर तूफानी वेग से मँडरा रही थी। “बच्चे मेरे ऊपर चढ़ जाओ” वृक्ष ने बालक
 से कहा और अपनी डालें इतनी नीचे झुका ली जितना कि सम्भव था। परन्तु बच्चा फिर भी न चढ़ सका क्योंकि वह
बहुत ही छोटा था।
यह देख कर राक्षस का हृदय द्रवित हो उठा, “उफ मैं कितना स्वार्थी रहा हूँ आं अब मैँ समझा कि बसन्त मेरे यहाँ क्यों
नहीं ठहरती। अब मैं इस बच्चे को वृक्ष के शिखर पर बैठाऊँगा और वहाँ से अपनी दीवाल का दरवाजा खटखटाऊँगा और
 तब मेरा बगीचा हमेशा बच्चों के खेल का मैदान बन जाएगा” वह वास्तव में अपनी करनी पर बहुत दुखी हो रहा था।
अब वह सीढ़ी से उतर कर नीचे आया और धीरे से अपने सामने वाला दरवाजा खोल कर बगीचे में चला गया ? लेकिन
 लड़कों ने ज्योंही उसे देखा वे उससे इतना डर गए कि वे देखते ही भाग गए और बगीचे में पुनः शिशिर ऋतु का राज्य
 छा गया। केवल वही एक छोटा लड़का बचा जो दौड़ कर भाग नहीं सका क्योंकि उसकी आँखें आँसुओं से भरी थीं
 इसलिए वह राक्षस को आते हुए न देख सका। राक्षस ने इसी बच्चे को चुपके से पीछे से जाकर पकड़ लिया और उसे
प्यार भरे हाथों से लेकर वृक्ष के शिखर पर बैठा दिया। उसके ऐसा करते ही पेड़ में फूल लग गये और पक्षी गण वहां
आकर कूकने लगे छोटे बच्चे ने भी अपने दोनों हाथ फैला कर राक्षस के गले में डाल दिए और उसे चूम लिया। जब
दूसरे लड़कों ने यह सब देखा तो समझ लिया कि राक्षस अब दुष्ट नहीं रहा है और वे दौड़ कर बगीचे में आए और उनके
साथ बसन्त ने भी अपने चरण वहाँ रखे और उनको देख कर राक्षस ने कहा, “प्यारे बच्चों अब यह तुम्हारा ही बगीचा है ?
 और उसकी कुदाली लेकर दुर्ग की दीवार को तोड़ डाला। बारह बजे दिन को जब सब लोग बाजार जा रहे थे उन्होंने देखा
कि राक्षस एक बडे ही सुन्दर बगीचे में बच्चों के साथ खेल रहा है।
सारे दिन वे खेलते रहे और शाम के वक्त वे राक्षस से विदा लेने के लिए आए।
“लेकिन तुम्हारा छोटा साथी कहाँ है ? मेरा मतलब उस बच्चे से है जिसे मैंने पेड़ पर चढ़ा दिया था” उसने कहा। राक्षस
 उसे सबसे अधिक प्यार करता था क्योंकि उस बच्चे ने उसे चूमा था।
“हमें उसका पता नहीं है। बहुत सम्भव है कि वह चला गया हो” बच्चों ने कहा।
“तुम लोग उससे यहाँ कल आने के लिए कह देना” - राक्षस ने कहा।
लेकिन बच्चों ने जवाब दिया- “हम नहीं जानते हैं कि वह कहां रहता है और न हमने उसे इसके पहले कभी देखा ही है।
” यह सुनकर राक्षस बहुत दुखी हुआ।
प्रति दिन दोपहर को जब स्कूल की छुट्टी हो जाती थी तब बच्चे आते और राक्षस के साथ खेला करते थे लेकिन जिस
 छोटे बच्चे को राक्षस प्यार करता था वह कभी नहीं दिखाई दिया। राक्षस इन सब बच्चों के प्रति बहुत ही दयालु था।
तथापि वह अपने छोटे मित्र को देखने के लिए तरसता रहता था और हमेशा उसके विषय में चर्चा किया करता था।
 वह कहा करता “ मैं उसको देखने की कितनी तीव्र इच्छा रखता हूँ। वर्ष बीतते गये और राक्षस बहुत वृद्ध और शिथिल
 हो चला और अधिक खेलने की सामर्थ्य उसमें नहीं रह गई। इसलिए बह एक बडी आराम कुरसी पर बैठा रहता और
अपने बगीचे की प्रशंसा किया करता। वह कहता “मेरे बगीचे में कई प्रकार के सुन्दर पुष्प हैं लेकिन सब पुष्पों में बच्चे
ही सबसे अधिक सुन्दर पुष्प हैं।“ जाड़े में एक दिन सुबह कपड़े पहनते हुए राक्षस ने अपनी खिड़की के चारों ओर देखा।
 उसने शिशिर के प्रति घृणा प्रकट नहीं की क्योंकि वह जानता था कि सोता हुआ बसन्त ही शिशिर होता है। इसीलिए
पहले भी इस ऋतु में मचकुन्द हो जाते हैं।
अब उसने अचानक ही अपनी आखें मलीं और वह आश्चर्य चकित हो देखता रह गया। वास्तव में यह एक शानदार दृश्य
था। उसके बगीचे के सबसे दूर वाले कोने में एक पेड़ था जो सुन्दर सुन्दर सफेद कलियों से लदा हुआ था। इसकी सभी
 डालियाँ सुनहली थीं और उनमें रुपहले फूल लदे हुए थे। उसके नीचे वही छोटा लड़का खड़ा था जिससे उसने सबसे
पहले प्यार किया था। आनन्द विभोर होकर वह अपने महल से नीचे आया और बगीचे में गया। वह जल्दी-जल्दी घास
पर चल कर उस लड़के के पास गया और जब उसके पास पहुँचा तो उसका चेहरा क्रोध से लाल हो गया। वह बोला “यहाँ
 तुम्हें किसने बांधा है.” उस लड़के की हथेली पर और उसके पैर पर दो दो कीलों के चिह्न थे। उसे देखकर वह झल्ला कर
 फिर बोला, “किसने तुम्हें यहाँ बाँध रखा है? मुझे जल्दी बताओ जिससे मैं उसे अपनी तलवार के घाट उतार सकूं।“
“मेरे दादा। ऐसा मत कहो। यह तो प्यार के धाव हैं.” उस बालक ने उत्तर दिया।
“तुम कौन हो?” राक्षस ने पूछा और वह भय से थरथरा उठा और कुछेक क्षणों में वह उस छोटे बच्चे के सामने घुटने
टेककर नत मस्तक हो गया। राक्षस की इस स्थिति पर बच्चे को बहुत हँसी आई ओर उसने कहा, “दादा तुम एक बार
 और मुझे अपने बगीचे में खेलने दो फिर मैं आज ही तुम्हें अपने बगीचे में ले चलूंगा। क्या जानते हो कि मेरा बगीचा
कौन है? मेरा बगीचा तो स्वर्ग है।”
उसी शाम को जब बाल मंडली उस बगीचे में खेलने गई तो उसने देखा कि उस पेड़ के नीचे सफेद पत्तियों से पूरी तरह
ढंका हुआ राक्षस वहां मरा पड़ा है।
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सुखी राजकुमार तथा अन्य कहानियाँ - विन्ध्याचल प्रकाशन छतरपुर से साभार


Monday, 8 October 2012

george marvellous medicine : roald dahl


george marvellous medicine : roald dahl

this is my first book of roald dahl. this book is awesome book for me and this book is funniest book. in every sentence there is something funny.
brief description
setting: George grandma is very different grandma . she all ways torture George.and George doesn't like it.
middle; George thought of a plan to make medicine .the medicine name was marvellous medicine.

end: George at last made a medicine and give to the grandma . the grandma was some times getting fat, tall, short, flying,etc.
and for more information go and read the book.

A big scary shocking dream


       A big scary shocking dream
All I could see were dry, Rocky Mountains on both sides of a never ending road! The lack of trey tracks on the muddy path indicated that it had had no recent travellers. I realized by then that I had in fact lost my way to the resort. I was sure my friends were wondering where I was and were trying to reach me on my phone which unfortunately no signal in the deserted place!  The rumbling noises of the car engine was beginning yo give me a headache.

“UFF! I am driving from 3 hours and still I can’t find my way to the resort”. Suddenly a bluish light flash came on my face and one terrific person came with a round shape body. He has four eyes {two in front and two back}, one mouth and was wearing a black pant. I was scared and my body was shivering. I asked “who are you “.  King of the desert answered the monster “what king”  . “Yes, I am the water man and I help everyone who lost the ways.

I was whispering and saying, can you help me, I am lost my way. Suddenly an angel came and takes me and threw me in a river.
I was shocked and suddenly a voice came chocolate! Chocolate!. And I fell down and said ouch help me ,help me and my mom came and wake me up then I realized that it is a bad dream.

                “A big scary dream”  

My weirdest dream!!!


My weirdest dream!!!



I was in the garden. Meanwhile, I came for a walk to the garden. There was not a signal soul in the garden.

At the same time, swinging, suddenly I show a figure behind me.  When I saw there was nobody. I really frightened. I ran to my car to go home as quick as I can. I draw for a while, and something was moving on my car mirror. And then the ghost kills me!

        Aaaaaaaaa!!!! And when I get up I was sweating!

Saturday, 29 September 2012

HA HA HA!!! WOW WOW WOW!! JOKES



HA HA HA!!! WOW WOW WOW JOKES

 


Q. Can you jump higher than a 10-story building?
A. Of course you can, buildings can't jump.

Q. What do you call a man with eight legs?
A. Spiderman.

Q. What has a lot of keys but cannot open any doors?
A. A piano.

Q. Why did the turtle cross the road?
A. To get to the Shell Station.

Q. I have four fingers and a thumb but flesh and bones I have none. Can you guess?
A. A glove.

Q. Why do teachers wear sunglasses?
A. Because students are very bright.

Q. Why did the boy bring a ladder to school?
A. He thought it was a high school.

Q. Why do giraffes have long necks?
A. Because their feet smell.

Q. What has four wheels and flies?
A. A garbage truck.

Are you smart


                                            are you smart
muskan.rafik.kadiwar

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Across
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Ribsy/ Ramona the pest.
3.
the red pyramid book author is rick riordan but it has a cronicle.
8.
Miss ali and government always say use not to do.
9.
It say no complain no demand.
10.
What we call book that give use information that is not true.
11.
Which book always end?
Down
1.
author if the book that miss read for use
4.
What we call book that give use true information.
5.
In these book there is a character she dose sniff sniff.
6.
Who care Winn Dixie
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He smile showing his teeth and moving his tale.
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